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मक्का से बनेगा 75% इथेनॉल: अब गन्ने पर कम निर्भरता

मक्का से बनेगा 75% इथेनॉल: अब गन्ने पर कम निर्भरता

मक्का से बनेगा 75% इथेनॉल: अब गन्ने पर कम निर्भरता

2026-08-23 16:15:01
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मक्का से बनेगा 75% इथेनॉल: अब गन्ने पर कम निर्भरता

भारत के ethanol programme में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी ethanol production के लिए गन्ने और sugar industry पर काफी निर्भरता थी, लेकिन अब अनाज, खासकर मक्का, तेजी से प्रमुख feedstock बन रहा है।

हालिया सरकारी बयान के अनुसार भारत में बनने वाले कुल ethanol का करीब 75% हिस्सा अब गन्ने के बजाय अनाज से आ रहा है, जिसमें मक्का की बड़ी भूमिका है।

यह बदलाव सिर्फ fuel industry के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। इसका असर चीनी की कीमत, किसानों की आय, मक्का की मांग, पशु-पक्षी feed की लागत और sugar companies पर भी पड़ सकता है।

मक्का की ओर क्यों बढ़ रहा है भारत?

भारत ने petrol में ethanol blending को तेजी से बढ़ाया है। इसके लिए केवल sugarcane पर निर्भर रहना कई कारणों से चुनौतीपूर्ण है।

गन्ने को तैयार होने में लंबा समय लगता है और इसकी खेती में पानी की जरूरत भी अधिक होती है। दूसरी तरफ grain-based ethanol plants सालभर feedstock की उपलब्धता के हिसाब से ज्यादा flexible हो सकते हैं।

ICAR के अनुसार वर्तमान में sugarcane भारत की ethanol requirement का लगभग 30–35% पूरा करता है और sugar mills की seasonal operation की वजह से पूरे साल ethanol feedstock उपलब्ध कराने की चुनौती रहती है।

यही कारण है कि सरकार और industry maize जैसे grains की ओर diversification कर रहे हैं।

अब ethanol में grains की हिस्सेदारी कितनी है?

जुलाई 2026 की एक industry report के अनुसार जून 2026 तक भारत की ethanol supply में लगभग 67% हिस्सा grains से आ रहा था, जबकि करीब 33% sugarcane-based feedstocks से था।

इसके बाद अगस्त में सरकार की ओर से बताया गया कि वर्तमान ethanol production में करीब 75% हिस्सा grains से आता है।

इससे साफ है कि भारत का ethanol sector तेजी से sugarcane-centric model से grain-based model की ओर बढ़ रहा है।

मक्का किसानों के लिए बड़ी खबर

Ethanol industry में maize की मांग बढ़ने का सीधा फायदा किसानों को मिल सकता है।

अगर ethanol plants लगातार मक्का खरीदते हैं तो किसानों को एक अतिरिक्त बड़ा बाजार मिलता है। इससे maize cultivation का रकबा और production दोनों बढ़ सकते हैं।

2025 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी बताया था कि ethanol demand के कारण मक्का की कीमतों और खेती के क्षेत्र में वृद्धि देखने को मिली है।

हालांकि किसानों के लिए इसका दूसरा पहलू भी है। अगर ethanol plants की मांग बहुत तेजी से बढ़ती है, तो maize की कीमत बढ़ सकती है और poultry तथा animal-feed industry की लागत भी बढ़ सकती है।

क्या अब गन्ने की मांग घट जाएगी?

ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

Sugarcane अभी भी sugar और ethanol दोनों industries के लिए महत्वपूर्ण crop है। भारत में sugar mills के पास cane-based ethanol production की बड़ी क्षमता मौजूद है।

लेकिन ethanol production में maize और दूसरे grains की हिस्सेदारी बढ़ने से गन्ने पर ethanol के लिए होने वाली अतिरिक्त मांग का दबाव कम हो सकता है।

इसका मतलब यह हो सकता है कि गन्ने से बनने वाली ethanol और sugar के बीच competition कुछ कम हो।

चीनी की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

हाल में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा price rise को ethanol के लिए sugar diversion से जोड़ना सही नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ethanol production के लिए diverted sugar का हिस्सा 2022-23 के लगभग 12% से घटकर 2025-26 में करीब 9% रह गया है।

इसलिए सरकार के अनुसार मौजूदा चीनी महंगाई के पीछे कम sugar production, मौसम की समस्याएं, त्योहारी मांग और कुछ बाजारों में hoarding/speculation ज्यादा महत्वपूर्ण कारण हैं।

फिर भी grain-based ethanol का बढ़ना भविष्य में sugar market के लिए सकारात्मक हो सकता है क्योंकि ethanol बनाने के लिए sugarcane diversion पर निर्भरता कम होगी।

E20 पेट्रोल के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत में E20 petrol यानी petrol में 20% ethanol blending का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। अब चुनौती है कि इतनी बड़ी मात्रा में ethanol की supply लगातार बनी रहे।

अगर ethanol production के लिए सिर्फ sugarcane पर निर्भरता रहती, तो खराब मानसून, बीमारी या sugar production में गिरावट होने पर fuel blending programme प्रभावित हो सकता था।

Maize और दूसरे grains का इस्तेमाल बढ़ाने से supply sources diversify होते हैं।

यानी E20 programme के लिए maize एक strategic backup और major feedstock बनता जा रहा है।

क्या मक्का से ethanol बनाना बेहतर है?

इसके कई फायदे हैं।

पहला—feedstock diversification:
भारत को केवल sugar industry पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

दूसरा—किसानों के लिए नया बाजार:
Maize farmers को ethanol plants से अतिरिक्त demand मिल सकती है।

तीसरा—sugar availability:
गन्ने से ethanol diversion की जरूरत कम होने पर sugar production के लिए cane availability बेहतर हो सकती है।

चौथा—ethanol supply में flexibility:
Grain-based distilleries के कारण सालभर feedstock sourcing के विकल्प बढ़ते हैं।

लेकिन एक बड़ी चुनौती भी है

मक्का केवल ethanol बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं होता।

इसका इस्तेमाल poultry feed, animal feed और food products में भी होता है। इसलिए ethanol industry में maize की demand बहुत तेजी से बढ़ने पर feed और food sector में भी कीमतों का दबाव आ सकता है।

यानी सरकार के सामने एक संतुलन बनाना होगा:

Fuel के लिए मक्का कितना जाए और food/feed industry के लिए कितना उपलब्ध रहे।

इसी वजह से ethanol policy का असर सिर्फ petrol pumps तक सीमित नहीं रहेगा।

Sugar companies पर क्या असर पड़ेगा?

Sugar companies के लिए तस्वीर mixed हो सकती है।

एक तरफ sugar prices ऊंची रहने से companies की sugar realization बेहतर हो सकती है। दूसरी तरफ अगर सरकार ethanol production में grain-based feedstocks को ज्यादा बढ़ावा देती है, तो sugar mills को cane-based ethanol से मिलने वाले revenue में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

लेकिन जिन sugar companies के पास integrated ethanol capacity और diversified feedstock capability है, वे बदलते market environment में बेहतर position में रह सकती हैं।

Investors को इसलिए केवल sugar price देखकर stock खरीदने के बजाय company की sugar production, ethanol capacity, cane cost, debt और profitability को भी देखना चाहिए।

क्या इससे पेट्रोल सस्ता होगा?

सीधा असर पेट्रोल की retail price पर दिखाई देना जरूरी नहीं है।

Ethanol blending का उद्देश्य सिर्फ petrol को सस्ता करना नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य crude oil imports पर निर्भरता कम करना, domestic agricultural feedstock का इस्तेमाल बढ़ाना और energy security मजबूत करना है।

भारत अपनी crude oil requirement का बड़ा हिस्सा import करता है, इसलिए domestic ethanol production से imported fossil fuel की जरूरत को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

आगे क्या होगा?

आने वाले वर्षों में भारत का ethanol sector और ज्यादा diversified होने की संभावना है।

Maize के साथ broken rice, surplus grains और अन्य feedstocks भी ethanol production में भूमिका निभा सकते हैं। सरकारी ethanol policy पहले से ही sugarcane के अलावा corn, broken rice और अन्य starch-containing materials से ethanol production की अनुमति देती है।

इससे भारत का biofuel sector एक ही crop पर निर्भर रहने के बजाय multi-feedstock model की ओर बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

भारत के ethanol programme में बड़ा बदलाव हो रहा है। गन्ने से आगे बढ़कर मक्का और दूसरे grains ethanol production के प्रमुख स्रोत बन रहे हैं।

हालिया सरकारी जानकारी के अनुसार कुल ethanol production का करीब 75% अब grains से आ रहा है।

इस बदलाव से किसानों के लिए मक्का की मांग बढ़ सकती है, sugar industry पर ethanol के लिए cane diversion का दबाव कम हो सकता है और E20 programme को ज्यादा diversified feedstock supply मिल सकती है।

लेकिन इसके साथ maize की कीमत और poultry/feed industry पर संभावित असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यानी भारत की ethanol कहानी अब सिर्फ गन्ने की नहीं रही—मक्का तेजी से इस पूरी energy economy का नया बड़ा खिलाड़ी बन रहा है।

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